कैलाश पर्वत के हैरान कर देनेवाले रहस्य,वैज्ञानिक के उड़े होश । mystery behind Kailash Parvat in Hindi
कैलाश पर्वत
एक ऐसा पर्वत जहाँ पर भगवान शिव का निवास कहा जाता है एक ऐसा पर्वत है जिसे साधारण पर्वत नहीं बल्कि धर्म का प्रतीक भी माना जाता है। भारत में वैसे कई जगह है जहाँ पर भगवान शिव के चमत्कार देखने को मिल जाते हैं, लेकिन ये पर्वत खुद ही एक चमत्कार है। कहते हैं कि कैलाश पर्वत का शिखर अब तक कोई फतह नहीं कर पाया है। इस पर्वत का केंद्र भी एक रहस्य से कम नहीं है। ये कैलाश पर्वत तिब्बत में स्थित है और यहाँ एक ऐसा नाम प्रसिद्ध है जो 1000 साल पहले कैलाश पर्वत के शिखर तक पहुंचा था।
दोस्तों हम आपको कैलाश पर्वत पर चढ़ने वाले एकलौते इंसान की जानकारी के साथ साथ कैलाश पर्वत के कुछ अनजाने रहस्यों से अवगत करवाने वाले हैं |
6628 मीटर उंचा कैलाश पर्वत माउंट एवरेस्ट से 2200 मीटर छोटा है, लेकिन माउंट एवरेस्ट पर अब तक सैकड़ों लोग चढ़ चूके हैं। इसी लिस्ट में आपको कैलाश पर्वत पर चढ़ने वाले हैं। किसी इंसान का नाम नहीं मिलेगा। कहते हैं कि इस पर्वत पर सिर्फ एक सिद्ध और सच्चाई चढ़ सकता है।
ऐसे लिस्ट या टैक्स बुक में आपको कोई ऐसा नाम नहीं मिलेगा जिसने यह कारनामा किया हो। इसी कारण से इस पर्वत को अजय कहा जाता है। यानी जिसे जीता ना जा सके। लेकिन अगर आप के इतिहास को खंगाल के देखेंगे तो आपको पता चलेगा की 1000 साल पहले तिब्बत में एक अध्यात्मिक संत ने ऐसा करके दिखाया था जिनका नाम जेटसन मिलारेपा था। वो तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु थे। उन्होंने गहन साधना करके एक ज्ञान हासिल किया था। कहते हैं की मारपा संत मिलारेपा के गुरु थे।
लेकिन बाद में वो मिलारेपा के शिष्य बन गए थे। जब मिलारेपा ने कैलाश पर्वत पर चढ़ाई शुरू की तो उनके साथ एक आध्यात्मिक गुरु ने भी चढ़ाई शुरू की थी। लेकिन कैलाश पर्वत के काफी ऊपर चढ़ने के बाद उस गुरु से सूर्य की तीव्रता पीस और अजीब शक्ति का आभाष का सामना नहीं हो पाया। तब मिलारेपा ने कैलाश पर्वत के शिखर को छुआ और वहाँ पर तप भी किया। कहते हैं कि मिलारेपा ने कुछ ही क्षणों में शिखर तक पहुँच सकते थे। उसके बाद वो विश्व में बहुत ज्यादा प्रसिद्ध हो गए।
उनकी कहानियों से यह पता चलता है की पारलौकिक ज्ञान रखने वाला कैलाश पर्वत पर बहुत ही जल्दी पहुँच सकता है जो इस से भी बाहर देख सकता है। पूरे कलयुग में सिर्फ यही एक वाक्य है जब किसी ने कैलाश पर्वत के शिखर को छुआ हो। अगर इतिहास में पढ़े तो 1926 को Hugh Ruttledge ने सभी उपकरणों के साथ इस पर्वत की चढ़ाई शुरू की थी। लेकिन अजीब मौसम, दिशाभ्रम और समय की रफ्तार बदलने जैसे विज्ञान को भी समझ में नहीं आनेवाले कारणों से वह इस पर्वत पर चढ़ नहीं पाए थे।
उसके बाद कई विश्वविख्यात पर्वतारोही इसे चढ़ने की कोशिश की लेकिन चढ़ नहीं पाए। हर कोई अपने हट के कारण यहाँ पर तो आ जाता था लेकिन कैलाश पर्वत के शक्तियां के आगे वह नतमस्तक होकर रह जाता था। हर पर्वतारोही का Experience एक जैसा ही रहता था। इस पर्वत पर पैर रखते ही समय की रफ्तार बदल जाती थी। बाल और पैरों के नाखून बहुत तेजी से बढ़ते थे। दिशाभ्रम कम्पास का काम नहीं करना वो हर किसी को भटका देता था। मौसम की भविष्यवाणी ना कर पाना इस पर्वत को अजय बना देता है।
वैज्ञानिक इसके केंद्र में से आ रही Radio-activity का भी पता अब तक नहीं लगा पाए। आखिर वो क्या रहस्य है इस पर्वत के पीछे जो हर किसी को इस पर्वत पर चढ़ने से रोकता है और आखिर कैसे मिलारेपा ने योग ज्ञान पाया,जिससे वो इस विशाल पर्वत पर कुछ ही क्षणों में पहुँच पाए?
महादेव को आदि योगी कहा जाता है। यानी उन्होंने सबसे पहले ध्यान और योग का ज्ञान सिखाया था। इसी ज्ञान से आप इस पर्वत पर आसानी से पहुंचा जा सकता है, जिसपर आधुनिक तकनीक से भी नहीं पहुंचा जा सकता है।
हर हर महादेव
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