जगन्नाथ पुरी मंदिर के 5 रहस्य
ये article मे आप क्या जानेगे
1) जगन्नाथ पुरी मंदिर ध्वज हमेशा हवा के विपरीत दिशा में क्यों लहराता है।
2) यहाँ का खाना क्यों कभी कम नही होता है?
3) यहाँ पर No Flying Zone क्यों है?
4) क्यों यहाँ पर Ex. Prime minister Indira Gandhi जी को आने की permission नही थी?
दोस्तों भारत के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ का एक ऐसा मंदिर है जहाँ पर साइंस भी काम नहीं करता है, जहाँ पर मंदिर का खाना कभी ज्यादा या कम नहीं होता है। चाहे जीतने भी श्रद्धालु क्यों ना जाए और वहाँ का ध्वज हमेशा हवा के विपरीत दिशा में लहराता है।
और ये भी कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण का दिल आज भी जगन्नाथ में है। उसके अलावा इस मंदिर को मुगल राजा और विदेशी ताकत के द्वारा 17 बार खंडित करने का प्रयास किया गया। फिर भी ये मंदिर खंडित नहीं हुआ है। तो दोस्तों ऐसा क्या है इस मंदिर में जो दूसरे मंदिर से अलग करता है तो चलिए जानते हैं आज के इस वीडियो में नमस्कार दोस्तों आपका TECH 4 FACT में स्वागत है। भगवान जगन्नाथ पुरी का मंदिर चार पवित्र धाम में आता है जो बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी और रामेश्वरम में भगवान जगन्नाथ मंदिर में हर साल रथयात्रा निकलती है, जिसमें तीन रथ होते है |
जिसमें भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र होते हैं। उसके अलावा भगवान जगन्नाथ मंदिर का निर्माण गंगा डाइनैस्टिक के द्वारा मार वीं सेंचुरी में किया गया था। और बात करें मंदिर की तो पूरा नहीं मान्यता के हिसाब से इस मंदिर में बहुत ही रहस्य है जिसमें सबसे पहला रहस्य के आम तौर पर कोई भी मंदिर का ध्वज हवा की दिशा में लहराता है। परंतु जगन्नाथ मंदिर एकलौता ऐसा मंदिर है जहाँ का ध्वज हवा के विपरीत दिशा में लहराता है। उसके साथ अब ध्वज के नीचे का चक्कर कहीं से भी देखो आपको सम ऐंगल पर ही दिख जाता है हर तरफ से |
दोस्तों आप मंदिर के बाहर खड़े रहते हो तो आपको समुद्र की तेज लहरें सुनाई देती है।परन्तु अब जैसे मंदिर के अंदर जाते हो। आपको समुद्र की लहरें बिल्कुल भी नहीं सुनाई देती है। उसी के साथ आमतौर पर दिन में समुद्र की लहरें धरती की तरफ बहती है। परंतु जगन्नाथपुरी एक ऐसी जगह है जहाँ पर दिन में समुद्र की लहरें धरती से समुद्र की तरफ और शाम को समुद्र से धरती की तरफ बहती है। तो ये एक ऐसा रहस्य है जो आज के आधुनिक समय में भी साइंस नहीं सुलझा सका है। उसके अलावा जगन्नाथ मंदिर एक ऐसा मंदिर है जहाँ पर नो फ्लाइंग ज़ोन है और कोई पक्षी भी इस मंदिर के ऊपर से नहीं उठता।
दोस्तों आम तौर पर मंदिर के ऊपर पक्षी मिल ही जाते हैं, परंतु इस मंदिर के ऊपर कोई पक्षी भी नहीं बैठता है। एक रहस्य वाली बात वो भी है कि मंदिर का प्रसाद कभी भी कम या ज्यादा नहीं होता। चाहे जीतने भी लोग खाना खाने के लिए आये और आपको शायद पता नहीं होगा कि जगन्नाथ मंदिर का रसोईघर दुनिया का सबसे बड़ा रसोईघर है जहाँ पर प्रसाद बनाने का तरीका कुछ अलग ही है। जैसे की यहाँ पर साथ मिट्टी के बर्तन को एक के ऊपर एक रखा जाता है और नीचे से आग जलाई जाती है। परंतु सरप्राइज़ वाली बात वो है की लॉजिकली सबसे नीचेवाला बर्तन में खाना सबसे पहले पकना चाहिए और सबसे ऊपर वाले में सबसे लास्ट में पकना चाहिए परंतु यहाँ पे भी रिवर्स होता है।
सबसे ऊपर वाला खाना सबसे पहले पकता है और नीचे वाला सबसे आखिर में पकता है। परंतु एक यही रहस्य नहीं है इस मंदिर का। उसके अलावा इस मंदिर का ध्वज हर रोज़ चेंज होता है। अगर गलती से भी 1 दिन ना बदला जाए तो ये मंदिर 18 सालों के लिए बंद हो जाएगा। ये प्रथा पिछले 1800 साल पहले से चली आ रही है और उसके अलावा बात करें मंदिर के इतिहास की तो वो बहुत ही खतरनाक है जिसमें मुगलों से लेकर विदेशी ताकतों ने इस मंदिर को तोड़ने का प्रयास किया है। जिसमें सबसे पहला प्रयास 1340 में सुल्तान लिया किया गया था।
फिर दूसरा 1360 में दिल्ली के सुल्तान फिरोजशाह तुगलक के द्वारा किया गया था। उसके बाद 1509 में फिर से इस्माइल गाजी के द्वारा किया गया था तो ऐसा करके 1340 से लेकर 1700 तक कई बार जगन्नाथ मंदिर को तोड़ने का प्रयास किया गया, परंतु हमारे पूर्वजों के द्वारा हर बार इस मंदिर को खंडित होने से बचा लिया। उसके अलावा कहा यही भी जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण का दिल आज भी जगन्नाथ मंदिर में सुरक्षित है।
तो बात ऐसी है कि भगवान श्रीकृष्ण सोमनाथ में विश्राम कर रहे थे, तब एक ज़रा नाम का शिकारी ने भगवान श्रीकृष्ण के पैर में तीर मारा था, जिसकी वजह से भगवान श्रीकृष्ण ने अपना शरीर छोड़ दिया था और पुराने मान्यता के हिसाब से तब भगवान श्रीकृष्ण का दिल सोमनाथ से जगन्नाथपुरी तक आ गया था। तो दोस्तों आप जानना चाहते हो कि भगवान श्रीकृष्ण का दिल सोमनाथ से जगन्नाथपुरी तक कैसे आया? तो इस वीडियो के नीचे जरूर से कमेंट कर दीजियेगा, जिससे हम आने वाले समय में वो वीडियो भी बना लेंगे। अब बढ़ते है आगे।
अगर आपको शायद पता नहीं होगा कि भगवान जगन्नाथ की मूर्ति हर 12 साल में बदली जाती है। और जीस दिन ये होता है तब उड़ीसा की गवर्नमेंट वो पूरे एरिया में इलेक्ट्रिसिटी बंद कर देती है जिससे कोई इसे ना देख सके और जो भी है मूर्ति चेंज करता है उसकी आंख पर भी पट्टी बांध दी जाती है क्योंकि वो भी ना देख सके तो उस टाइम पे भगवान श्रीकृष्ण का दिल पुरानी मूर्ति में से निकालकर नई वाली मूर्ति में डाल दिया जाता है। मान्यता के हिसाब से जो भी है दिल देख लेता है, वो अपने प्राण छोड़ देता है और दोस्तों आपको बता दें कि इस मंदिर में बहुत से रिस्ट्रिक्शन होते हैं।
जैसे कि इस मंदिर में सिर्फ सनातनी हिंदू ही एंटर कर सकते हैं, उसके अलावा नो एंट्री होती है।ये चीज़ मंदिर के बाहर शिलाजीत पर पांच भाषा में लिखी हुई है। इस मंदिर की रिस्ट्रिक्शन इतनी स्ट्रिक्ट होती है जहाँ पर प्राइम मिनिस्टर इंदिरा गाँधी जी को भी परमिशन नहीं मिलती क्योंकि वो हिंदू नहीं थी। वहाँ के ट्रस्ट और पुजारियों के हिसाब से इंदिरा गाँधी जी को अपना सरनेम फिरोज गाँधी से मिला था जो हिंदू नहीं थे। यह एकलौता केस नहीं है परंतु उसके अलावा 2006 में स्विट्जरलैंड के एक व्यक्ति ने ₹1,80,00,000 डोनेट किया था मंदिर के लिए |
फिर भी उन्हें मंदिर के अंदर नहीं जाने दिया गया था।और उन्हें बाहर से दर्शन करवाए थे। आप कितने भी पावरफुल या पैसे वाले क्यों ना हो, सनातनी हिंदू के अलावा आपको यहाँ पर एंट्री नहीं मिल सकती है। तो दोस्तों हम को इस मंदिर से यह पता चलता है कि भगवान के आगे किसी का नहीं चलता, चाहे कितना भी पॉवरफुल क्यों ना हो ।
धन्यवाद ||
Mostly People Ask :
jagannath puri
jagannath temple puri photos
jagannath temple puri mystery in hindi
jagannath temple puri mystery
What are the mysteries of Jagannath Temple?
What are the mysterious facts about Jagannath Temple?
Post a Comment